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रविवार, 27 अप्रैल 2014

चाहने वालों की तरह..

जिन्दगी जिसको तेरा प्यार मिला वो जाने,
हम तो नाकाम रहे चाहने वालों की तरह..

 जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया,
हम भटकते रहें आवारा ख्यालों की तरह,

 मुझको मिला क्या मेरी मेहनत का सिला,
चंद सिक्के हैं मिरे हाथ में छालों की तरह..

 हम से मायूस न हो ऐ शब-ए-दौराँ कि अभी,
दिल में कुछ दर्द चमकते हैं उजालों की तरह..

 गुनगुनाते हुए तू आ कभी उन सीनों में,
तेरी खातिर जो महकते हैं शिवालों की तरह..

 तेरे बिन रात के हाथों पे ये तारों के अयाग,
खूबसूरत हैं मगर जहर के प्यालों की तरह..

 हमसे भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह,
हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह..

शुक्रवार, 28 मार्च 2014

सोया नहीं कभी...

रोता हुआ चिराग बुझता नहीं कभी,
तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी..

इस मयकशी से दर्द बढ़ता नहीं अगर,
साकी तेरे मैखाने में आता नहीं कभी..

तेरे हुस्न की इबादत में गुजरी है जिंदगी,
इक तेरे सिवा और सोचा नहीं कभी..

शब ने मुझे सौगात दिया है गजल की,

मैं चांद के खातिर सोया नहीं कभी...!

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

ये शाम जरा ढल जाने दो


ये शाम जरा ढल जाने दो,
फिर किस्सा वही दोहराने दो..

एक मैं हूँ और एक ये मय है, 
अब आग जरा लग जाने दो..

देखेंगे कितनी बचेगी मय, 
हमको तो जरा तुम आने दो..

न जाने कब तक दौर चले, 
साक़ी को जरा शरमाने दो..

रिन्दों पे चढ़ी कुछ यूँ मस्ती, 
वो बोले आने दो आने दो..

समझेंगे तुम्हारी बातें सभी, 
पहले खुद को समझाने दो.. 

मय से भी ज्यादा नशा इनमें, 
तेरी आँखें है या पैमाने दो..

रूठा बैठा है रिन्दों का खुदा, 
उसको भी आज मनाने दो..

बन जाए न कोई बात कहीं, 
अब देर हुई घर जाने दो..

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

लो आज की रात भी गई नींद के इंतज़ार में..


लो आज की रात भी गई नींद के इंतज़ार में,
चाँद को देखते रहे उसकी दीद के इंतज़ार में..

हाय कितना मुश्किल है ये तन्हा रातें गुजारना,
लगता है कमी आ गई है वक़्त की रफ़्तार में..

बस यूँ ही कटती है रात ये करवट बदल बदल,
तेरी यादों ने ख़लल डाल दी है जैसे मेरे क़रार में..

यही दस्तूर है इसका यही मोहब्बत है शायद,
बिक जाओगे कुछ न खरीद पाओगे इस बाज़ार में..

मुझको खरीद कर ले गया महज़ दो इशारों में वो,
यही तो खास हुनर था मेरे उस ''गरीब'' खरीदार में..

कहीं दूर से टकरा के आ जाते हैं मेरे लफ्ज़ो सदायें, 
वो आता नहीं शायद मेरे दर्देदिल के मयार में..

तेरी हकीकत क्या है अब तू हमसे न छुपा सकेगा,
जरा गौर फरमा बहुत छेद है तेरे इस दुसार में..

हस्बे इत्तफ़ाक़ आज तेरा मिलना ये इत्तफ़ाक़ नहीं,
कोई तपिश उठ आई होगी शायद दिलेबेक़रार में..

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

उनसे प्यार कर लिया..

अच्छी खासी शख्शियत को बेकार कर लिया,
हमने भी जिद छोड़ दी उनसे प्यार कर लिया..

जब उसे छोड़ने की कोई तरकीब न निकली तो,
फिर उसके सामने खुद को गुनहगार कर लिया..

अपनी परछाईं भी दिखे तो क़त्ल कर दें उसका,
फिर पता नहीं उनपे कैसे भला ऐतबार कर लिया..

जब भी चाहा दिल ने कि उनका दीदार हो जाए,
तस्वीर को सीने से लगा विसाल-ए-यार कर लिया..

उस झील के पत्थर पे बैठ काट आये सारा दिन,
बस यूँ ही झूठ मूठ का तुम्हारा इंतज़ार कर लिया..

लफ़्ज़ों में घुल के आ गई उसके जिक्र की खुशबु,
लो हमने भी ग़ज़ल का मुखड़ा तैयार कर लिया..

जब से पलकों के शामियाने में दस्तक हुई उसकी,
नींद ने भी आँखों में आने से इनकार कर लिया..

सुना है उसके कानों को सच सुनने की आदत नहीं, 
तो हमने भी खुद को झूठ का फनकार कर लिया..


गुरुवार, 28 नवंबर 2013

अब उसका ख्वाब में आना..

अब उसका ख्वाब में आना भी क़यामत जैसे,
आँख बंद करने में महसूस होती है दहशत जैसे..

सब उसकी दास्तां कहें हमारा रोना कौन सुने,
तमाम शहर पे हो चलती उसकी हुकूमत जैसे..

जब भी मिलता है तो एक नई शर्त रख देता है,
लगता है कारोबार बन गई अब मोहब्बत जैसे..

उसके लिए तो अलग होना कोई दिल्लगी जैसे,
और मेरे लिए तो लुट गई हो कोई सल्तनत जैसे..

उफ़ ये बेकरारी ये तिशनगी ये तन्हाई और तड़प,
मोहब्बत मोहब्बत न हो यारो, कोई आफत जैसे..

बना है दर्द से रिश्ता तो उसका एहतराम है जरूरी,
हमको होती जा रही है मुक़र्रर इसकी आदत जैसे..

एक अर्से से कोशिश में हूँ कि मुस्कुरा लूं कभी,
मगर वो लम्हा देना ही नहीं चाहती किस्मत जैसे..

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

मोहब्बत बनी कश्मीर

जिंदगी जख्म की तस्वीर बनके रह गई,
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गई..

मैं बना फिरता हूं दीवाना तेरे गम में,
तू मेरे पैरों की जंजीर बनके रह गई..

इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते,
ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई..

सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी,
ये मुहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई..

गुरुवार, 2 मई 2013

प्यार क्यूँ हो जाता है


अचानक मिलती है किसी से ये आँखें,
फिर वो शक्श कुछ ख़ास हो जाता है..

मिलते है फिर वो अक्सर यूँही राहों में,
बिना सोचे हमें उस से प्यार हो जाता है..

चाहे कितने भी लोग मिलें हमें फिर,
लेकिन हमें बस वही शख्श भाता है..

फिर होती है कुछ मुलाकातें और बातें,
कुछ ही दिनों में फिर इजहार हो जाता है..

लगने लगता है बस वो ही शख्श अपना,
बाकी सब से वो बहुत दूर हो जाता है..

कुछ ही समय तक होती हैं प्यार से बातें,
फिर साथ  साथ रहना दुश्वार हो जाता है..

फिर करता है वो भगवान् से एक ही सवाल,
आखिर हमको ये प्यार क्यूँ हो जाता है..

रविवार, 28 अप्रैल 2013

कैसा प्यार करती थी


मैं रहता था हरदम हरपल उसके साथ उसके पास,
कुएं के पास होकर भी पानी की तलाश करती थी..

मैं कुछ भी कर बैठता था उसकी मुस्कराहट के लिए,
लेकिन वो ख़ुशी के ढेर में सदमे तलाश करती थी..

अजीब थी उसकी फितरत भी और उसकी आदतें भी,
मेरी खामोशियों में भी शोर की तलाश करती थी..

जब भी बैठता था मैं उसके साथ चाँद की चांदनी में,
पता नहीं कौनसे खोये हुए लम्हे तलाश करती थी..

लुटाता था मैं उस पर अपना प्यार पागलों की तरह,
लेकिन वो घुमा फिरा के जुदाई की बात करती थी,

अंत में जब आज़ाद कर ही दिया मैंने मोहब्बत से उसे,
फिर साथ में रहने कि मिन्नतें बार बार करती थी..

सोमवार, 18 मार्च 2013

भूल रहा हूँ उसको..


उसे शायद मुझसे बिछड़ने का कोई गम नहीं,
हमने भी सोचा उसके लिए मरेंगे हम भी नहीं..

कह के गया है वो तुम में अब पहले जैसी बात नहीं,
कहा मैंने तेरी चाहत में भी पहले जैसे जज्बात नहीं..

उसने कहा अब जिंदगी किसी और के साथ जिओ,
मैंने कहा शायद किसी में तुझ जैसी बात है ही नहीं..

उसने कहा मैंने तो कहा नहीं था इतना चाहने को,
मैंने कहा मैं इनसान ही हूँ कोई पत्थर तो नहीं..

पुछा उसने बड़े प्यार से क्या मैंने बेबफाई की है,
मैंने कहा बेबफाई मुक्कदर है मेरा तेरी खता नहीं..

कह के गया है कि भूल जा कैसे भी करके मुझको,
मैंने कहा ये सब हकीकत है कोई ख्वाब तो नहीं...

गुरुवार, 7 मार्च 2013

मुझमे तू रहता है...


ना बताऊंगा तेरी बेबफाई के किस्से किसीको,
मेरी जान मैंने तुम्हे अपना माना बहुत है..

दिल धडकता है अब बस तेरे ही नाम से,
इस दिल ने जान तुझको पुकारा बहुत है..

आँखें अब बस देखना चाहें तेरे ही ख्वाब,
इन आँखों ने कभी तुझे निहारा बहुत है..

जब भी दुआ मांगी है बस तुझे ही माँगा,
मेरी जान मैंने तुझे चाहा ही बहुत है..

जब भी तनहा होता हूँ तू याद आती है,
मेरे इस दिमाग ने तुझको सोचा बहुत है..

देखता हूँ रातभर बैठकर मैं अब चाँद को,
आँखों से बहती अब बरसात बहुत है..

सोचता हूँ तुझे इस दिल से निकाल फेंकू,
लेकिन इस दिल में तेरी यादें बहुत है..

चाहा कि तुझे भुला दूँ बेबफा समझकर,
भूल कर भी तू  मुझको याद आती बहुत है... 

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

तुझे अपना बना के रखूं..

तेरी सूरत को आँखों में बसा चुका हूँ मैं,
दिल चाहता है तुझे धड़कन बना के रखूं..

तुझे पाने का सपना अब देखता हूँ हरदम,
दिल चाहता है तुझे मैं तुझसे चुरा के रखूं..

तुझे चाहना तुझे सोचना अब है काम मेरा,
तेरे रंग रूप को मैं सबसे छुपा के रखूं..

करलूं कैद तेरे रंग रूप को अपने दिल में,
तुझे मैं प्यार की जंजीर पहना के रखूं..

कोई जान ना पाए मेरी आँखों में कौन है,
मैं अपनी आँखों को समुन्दर बना के रखूं..

दिल कहता है अब कोई और तुझसे ना मिले,
आखिरी सांस तक तुझे अपना बना के रखूं..

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

मैं साया हूँ तेरा..


जिंदगी में कभी खुद को अकेला ना समझना,
साथ हूँ मैं तेरे साया बनकर जुदा ना समझना,

चाहता हूँ मैं तुमको अपनी जान से भी ज्यादा,
मेरी मोहब्बत को कभी मजाक मत समझना,

तुमसे मेरी ज़िन्दगी है और है मेरी मौत भी,
जीवन में कभी भी मुझे अनजान ना समझना,

वादा है मेरा कि रहूँगा मैं तेरे साथ जीवन भर,
अगर ज़िन्दगी साथ न दे बेबफा ना समझना,

अब भी तू मेरा प्यार ठुकराना चाहे अगर,
मुक्कदर होगा ये मेरा अपनी खता ना समझना 

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

तुम आये तो सब अच्छा लगा..

दुनिया की इस भीड़ में एक अजनबी का सामना अच्छा लगा,
सब से नजरें छुपा कर बस उसको निहारना बहुत अच्छा लगा,

इन आँखों के पलकों पे कुछ मीठे मीठे ख्वाब से सजने लगे,
किसी और से बातें करते करते उसको सोचना अच्छा लगा,

कह तो वैसे भी हम कुछ नहीं रहे थे  लेकिन उसका एकदम,
मेरे सुर्ख होटों पर रख कर हाथ उसका रोकना अच्छा लगा,

हम तो बैठे थे दिल में अपने ना जाने कितने दर्दों को लिए,
तुम्हारे दर्द अब मेरे भी है कानों को ये सुनना अच्छा लगा,

हम तो अपने दिल को बाँध बैठे थे उसको भुलाने के लिए,
वो यूं मिला कि भूलने का बुरा इरादा तोड़ना अच्छा लगा...

गुरुवार, 24 जनवरी 2013

खुद को मिटाने वाले थे...


वो बहुत लडे हैं हमसे जो बड़े नाम वाले थे,
पर हम उसका दर छोड़ कर कहाँ जाने वाले थे,
हमने तो मोहब्बत निभाने की कसम खाई थी,
क्या थी खबर वो बीच रास्ते से जाने वाले थे,
आरज़ू उन्हें पाने की हमारे दिल में ही रह गयी,
साजिस थी उनकी हमारा दिल भी जलाने वाले थे,
बहुत कोशिश की सबने और तौहीन भी की है,
पर हमारे अन्दर हुनर सब दीवाने वाले थे,
अच्छा हुआ वो जल्द ही किसी और के हो गए,
वरना हम उनकी चाहत में खुद को मिटाने वाले थे...

शनिवार, 19 जनवरी 2013

अपने साथ अपना सब कुछ ले जा...


जुदा हुए ही थे तो मेरे दिल को भी साथ ले जा ,
मेरे इन प्यासे लबों से अपनी मिठाश भी ले जा,
चल और छोड़ आ मुझे कहीं घने जंगलों में,
ये धूप छाँव जैसी धुंधली आस भी ले जा,
मैं प्यासा हूँ बस तेरे प्यार के एक पल का,
अब जमी हुई मेरे होठों की प्यास भी ले जा,
मेरे कदम कदम पर सुहाने पलों की यादें है,
अब इन यादों से भरा ये इतिहास भी ले जा,
सांस सांस में खटकेगा तेरे ना होने का एहसास,
फिजा में बिखरी हुई अपनी खुसबू भी ले जा... 

गुरुवार, 10 जनवरी 2013

मैं तुझसे ही हूँ...


मुमकिन नहीं मैं भुला दूँ तुझे,
इस दिल से मैं निकाल दूँ तुझे,
तू रहता है बनके साया मेरे साथ,
कुछ ना चाहूँ बस चाहूँ तेरा प्यार,
तू जिंदगी में है तो जी रहा हूँ मैं,
जानले इतना तुझसे ज़िंदा हूँ मैं,
तू नहीं तो जिंदगी मेरी अधूरी है,
तुझसे ही मेरी हर ख्वाइस पूरी है,
इल्तजा है मेरी मेरे खुदा से अब,
ना रहे तू कभी आँखों से दूर अब...

गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

अजीब अफसाना है...


अब अपने हर गम को दुनिया से छुपाना है,
उसके दिए ग़मों में भी हरदम मुस्कुराना है,
मुझे नहीं है शिकायत अब भी उस से कोई,
होगी मजबूरी तभी तो  दूर रहने का ठाना है,
कभी वो मुझे अपनेआप से बढकर चाहता था,
आज वक़्त है कि वो मुझसे ही बेगाना है,
कभी पल पल की रखता था जो खबर मेरी,
आज के वक़्त वो मेरी हर बात से अनजाना है,
वो भूल गया मुझको मैं आज भी उसे चाहता हूँ,
अजीब है मेरी जिंदगी और अजीब अफसाना है...

सब तुमसे है...


मेरी जिंदगी में सुबह शाम तुमसे है,
मेरी कश्ती मेरी हश्ती सब तुमसे है,
मिले जितने भी दुःख सब तुमसे मिले,
लेकिन मेरी तमाम खुशियाँ भी तुमसे हैं,
पागल हो चुका हूँ मैं तेरे प्यार में अब,
अब दिल धड़कता भी बस तुमसे ही है,
जब भी तू याद आई तेरा नाम लिख दिया,
अब मेरा चैन और सुकून बस तुमसे है,
बुरे और अच्छे का सबब भगवान् जाने,
हमारी बुराई और अच्छाई भी तुमसे है,
मैं बस इतना ही कह सकता हूँ तुझसे अब,
मेरी जिंदगी और मौत भी अब तुझसे है...

गुरुवार, 8 नवंबर 2012

क्या हो गया...


टूट गया वो रिश्ता जो मेरा उसकी रूह से था,
छुट गया वो बंधन भी जो मेरी सांस से था,
बता के भी ना गया वो मुझसे क्यूँ नाराज था,
कह के चला गया ये रिश्ता ही बेबुनियाद था,
पहले वो मुझसे इस कदर मोहब्बत करता था,
चोट मुझे लगती थी और रोया वो करता था,
पता नहीं वक़्त की वो कैसी आंधी चली,
पता नहीं अचानक उसको ऐसा क्या हो गया,
वो मुझसे इस बहुत ही ज्यादा खफा हो गया,
वक़्त गुजरते गुजरते एक दिन ऐसा भी आया,
वो मुझे कहके अलविदा किसी और का हो गया..