सोमवार, 5 नवंबर 2012

भूलो सभी को मगर ,माँ- बाप को भूलना नहीं!


भूलो सभी को मगर ,माँ- बाप को भूलना नहीं!
उपकार अनगिनित है उनके,इस बात को भूलना नहीं!!
पत्थर पूजे कई तुम्हारे,जन्म के खातिर बेटे प्यारे!
पत्थर बन माँ-बाप का, दिल कभी कुचलना नहीं!!
मुख का निवाला दे बेटे,जिन्होंने तुम्हे बड़ा किया!
अमृत पिलाया तुमको, जहर उनके लिए उगलना नहीं!
कितना किया तुम्हे प्यार,सब अरमान भी पुरे किये!
पुरे करो अरमान उनके,बात यह बेटे भूलना नहीं!!
लाखो कमाते हो भले,माँ-बाप के आशीर्वाद से ज्यादा नहीं!
सेवा बिना सब राख है, घमंड में कभी फूलना नहीं!!
संतान से गर सेवा चाहो,संतान बन सेवा करो!
जैसी करनी वैसी भरनी,न्याय यह कभी भूलना नहीं!!
सोकर स्वयं गीले में,सुलाया तुम्हे सूखी जगह !
माँ की ममतामयी आँखों को,भूलकर भी कभी भिगोना नहीं!!
जिसने बिछाय फूल थे,हर दम तुम्हारी राहों में!
उस रहवर की राह के,कांटे कभी बनना नहीं!!
धन तो मिल जायगा,मगर माँ-बाप क्या मिल पायगे?
पल-पल पावन उन चरण की,चाह कभी भूलना नहीं!!  

पल पल कहता है


पल पल कहता है हर पल,
आजा होजा मुझमे तू शामिल,
ना रहे दरमियाँ कोई दूरियाँ,
प्यार अपना देख जले ये दुनिया,
रूह तड़प उठे जब हम अलग हों,
एक मर जाये अगर दुसरे को कुछ हो,
कटे जिंदगी एक दुसरे की बाँहों में,
बिछ्ड़ें जो हम तो मिले राहों में,
दम भी मेरा निकले तेरी बाँहों में,
अब भगवान् से एक दुआ मेरी है,
अगला जन्म भी गुजरे तेरी पनाहों में...

प्यार एक दर्द ....


गलती रही हमारी जो हमने उसे आजमाया नहीं,
जितना प्यार किया उसे कभी उतना पाया नहीं,
रोते हैं आज हम ये सोचकर कि अब वो मेरा नहीं,
जीते हैं सोचकर कि मेरी किस्मत में मोहब्बत नहीं,
ऊपर जाके लेंगे भगवान् से अपने दुखों का जबाब,
क्या मेरी ही किस्मत नहीं था किसी क्या प्यार,
भगवान् भी कहेगा कि ये तो अक्सर होता ही है,
जिस से ज्यादा प्यार हो वो दूर होता ही है .....

दूर हो गए वो....


सब रिश्ते अब टूट के चूर हो गए,
जब वो मेरी जिंदगी से दूर हो गए,
सोचा भी न उसने कि हम कैसे जी पायेंगे,
चल दिए ये कहकर कि अब साथ ना दे पायेंगे,
मैंने कहा ये बता जाओ गुनाह मैंने क्या किया,
उसने कहा कि सोचलो तुम्हारे साथ ना जी पायेंगे,
उसने कहा अब हम जा रहे किसी और के पास,
हमने कहा चले जाना जब हम राख हो जायेंगे... 

वो नहीं आया....


मुद्दत हुई वो इन आँखों को रुलाने नहीं आया,
मेरे इन होठों कि प्यास बुझाने नहीं आया,
कहता था रहेंगे हम सदा तुम्हारी बाँहों में,
अब मैं तनहा हूँ और वो गले लगाने नहीं आया,
कहता था कि जब भी अकेले होगे मुझे राहों में पाओगे,
अकेले पड़ गए हैं हम आज वो साथ निभाने नहीं आया,
कहता था जब भी सोना चाहोगे मेरे काँधे को पाओगे,
उठ चली आज मेरी अर्थी वो कंधा देने नहीं आया....

कुछ इस तरह से उसे प्यार ....


कुछ इस तरह से उसे प्यार करना पड़ता है,
कि उसे प्यार से इनकार करना पड़ता है,
और कभी कभी वो इतना करीब होता है,
कि खुद को दीवार करना पड़ता है,
इस तरह से आके वो लगता है सीने से,
कि खुद को हमेशा बीमार करना पड़ता है,
कहीं रूह में ना हो जाये वो मेरी शामिल,
इसलिए हरदम अपने को लाश करना पड़ता है...

मौत के नाम कर गया ...


वीरान मेरी सुबह शाम कर गया,
जबसे वो मुझको आखिरी सलाम कर गया,
फूलों के तोहफे जो दिया करता था मुझको,
वो आज काँटों की झाडी मेरे नाम कर गया,
जाने नहीं देता था जो मुझको शराब पीने,
आज वो खुद मुझको दारु के नाम कर गया,
लड़ते थे हर अपनों से भी जिसकी खातिर,
वो आज मुझे गैरों के नाम कर गया,
हसते थे जिसे हम अक्सर खुश देख कर,
देखो आज वो मेरा क्या अंजाम कर गया,
कहता था जो मुझको सभी के सामने अनमोल,
आज वो मुझको कौड़ियों के दाम कर गया,
जिसमे बस्ती थी मेरी खुद की जान,
आज वो ही मुझे बेजान कर गया,
दिया था हमने जिसे जिंदगी नाम,
आज वो ही हमने मौत के नाम कर गया...