सोमवार, 18 मार्च 2013

भूल रहा हूँ उसको..


उसे शायद मुझसे बिछड़ने का कोई गम नहीं,
हमने भी सोचा उसके लिए मरेंगे हम भी नहीं..

कह के गया है वो तुम में अब पहले जैसी बात नहीं,
कहा मैंने तेरी चाहत में भी पहले जैसे जज्बात नहीं..

उसने कहा अब जिंदगी किसी और के साथ जिओ,
मैंने कहा शायद किसी में तुझ जैसी बात है ही नहीं..

उसने कहा मैंने तो कहा नहीं था इतना चाहने को,
मैंने कहा मैं इनसान ही हूँ कोई पत्थर तो नहीं..

पुछा उसने बड़े प्यार से क्या मैंने बेबफाई की है,
मैंने कहा बेबफाई मुक्कदर है मेरा तेरी खता नहीं..

कह के गया है कि भूल जा कैसे भी करके मुझको,
मैंने कहा ये सब हकीकत है कोई ख्वाब तो नहीं...

11 टिप्‍पणियां:

  1. उसने कहा अब जिंदगी किसी और के साथ जिओ,
    मैंने कहा शायद किसी में तुझ जैसी बात है ही नहीं.. ....... बहुत खूब

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  3. Yahan toh dil ka ye aalam haj , kya kahun tumse ,, bhula ska na wo silsila jo kabhie tha hi nahi , , , , osum ankur

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  4. अगर भूलना इसे कहते है तो हर आशिक अपनी महबूबा को पल पल भूलना चाहेगा
    बहुत खूब भैया इकरार-ए-मोहब्बत के नऐ जूनून से मिला दिया

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  5. वाह बहुत हृदय स्पर्शी रचना है ये आपकी ।


    गर ख्वाब मै भी ऐसा पल आये हम नींद लेना छोड़ दें

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