गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

मजहब के नाम जिहाद है..



किसी माँ ने सुबह बच्चे का…
डब्बा तैयार किया होगा !
किसी बाप ने अपने लाल को..
खुलते स्कूल छोड़ दिया होगा !!
किसे पता था वह ..
अब लौटेगा नहीं कभी !
किसे पता था गोलियों से..
भून जायेंगे अरमान सभी !!
बच्चो में रब है बसता..
उस रब से मेरी फ़रियाद है !!
तालिबान यह कैसा तेरा …
मजहब के नाम जिहाद है !!
मेमनों की तरह बच्चे…
मिमियाए जरूर होंगे !
खौफ से डर कर आँखों में
आंसू आये जरूर होंगे !!
तुतलाये शब्दों से रहम की...
भीख भी तुझसे मांगी होगी !
अपने बचाव को हर सीमाये..
उसने दौड़ कर लांघी होगी !!
मासूमो के आक्रन्द से भी न पिघले..
हिम्म्त की तेरे देनी दाद है ! 
हे आतंकी... यह कैसा तेरा …
मजहब के नाम जिहाद है !!
भारत से दुश्मनी निभाने…
मोहरा बनाया उसने जिसे !
जिस साप को दूध पिलाया..
वही अब डस रहा उसे !
हे आतंक के जन्मदाता….
अब तो कुछ सबक ले !
यदि शरीर में दिल है ..
तू थोड़ा सा तो सिसक ले !
आतंक के साये ने हिला दी..
पाकिस्तान की बुनियाद है !
तालिबान यह कैसा तेरा…
मजहब के नाम जिहाद है !!
कौन धर्म में हिंसा को..
जायज ठहराया गया है !
कुरान की किस आयत में ..
यह शब्द भी पाया गया है !!
कब तक तुम्हारा बच्चा..
इस तरह बेबस रहेगा !
मांग कर देखो हाथ…
साथ हमारा बेशक रहेगा !!
सबक बहुत मिल गया अब..
आतंक की खत्म करनी मियाद है !
तालिबान यह कैसा तेरा…
मजहब के नाम जिहाद है !"

व्हाट्सएप पर मिली हुई एक कविता 

1 टिप्पणी:

  1. Vijailakshmi Vibha
    3 hrs ·
    मित्रो, पेशावर की हृदय विदारक घटना पर स्वयं निकल पडी यह रचना –
    ------------विश्व पटल पर पहली घटना ----------
    अंत करो अब महा सृष्टि का ,
    छोडो बच्चे पैदा करना ,
    ऐ माँ बहिनो तुम्हें कसम है ,
    बंद करो मानव संरचना ।
    ------देकर जन्म पालतीं इनको ,
    ------क्षण-क्षण तुम सँवारती इनको ,
    ------पढा लिखा कर मनुज बनातीं ,
    ------रंगों सा निखारती इनको ,
    इन पर ही हों इनके हमले ,
    बोलो है यह कैसी छलना ।
    ------यह तो सचमुच महा प्रलय है ,
    ------पापी भी पा गया विजय है ,
    ------बच्चों की हत्या है यह, या ,
    ------सचमुच मानवता क्षय है ,
    कैसे रोकोगी तुम आँसू ,
    मासूमों का देख तडपना ।
    -------मन से निश्छल सीधे सच्चे ,
    -------स्कूलों में पढते बच्चे ,
    -------गोलाबारी के शिकार हों ,
    -------कैसे हृदय न टूटें कच्चे ,
    भयाक्रंत होकर छोडेंगे ,
    अब ये स्कूलों में पढना ।
    -------अश्रु बहायेंगी माताएँ ,
    -------याद करेंगी ये हत्याएँ ,
    -------बाल - लहू से लिखी मिलेंगीं ,
    -------बस्तों में इनकी गाथाएँ ,
    साजिश के शिकार हों बच्चे ,
    विश्व पटल पर पहली घटना ।
    -------चीखें हाहाकार घिरा तम ,
    -------कैसा हृदयविदारक मातम ,
    -------जनने वाली जननी का ही ,
    -------टूट रहा है दुनिया में दम ,
    खोकर अपना लाल उसे अब ,
    भली न लगती खुद की रचना ।
    -------मारो इन दहशतगर्दों को ,
    -------दैत्यरूप मानव मर्दों को ,
    -------जाग उठो ऐ दुनियावालो ,
    -------समझो बच्चों के दर्दों को ,
    रात दिवस देखो अब केवल ,
    इन्हें मिटाने का ही सपना ।
    -------इन्हें मिटाना पुण्य कर्म है ,
    -------इसमें किंचित नहीं शर्म है ,
    -------हत्यारों की हत्या करना ,
    -------हर मजहब का महाधर्म है ,
    चुप रह कर बैठे तो होगा ,
    बच्चों का अपराधी बनना ।
    -------फैलायी इनने दरिन्दगी ,
    -------कठिन हो गई यहाँ जिन्दगी ,
    -------फेको इन्हें निकाल जहाँ से ,
    -------कचरे जैसी समझ गंदगी ,
    अश्रु पूर्ण श्रृद्धांजलि माँ की ,
    ऐ इतिहास सजा कर रखना ।
    ---------------विजयलक्ष्मी विभा-----------
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