सोमवार, 16 अप्रैल 2012

जाएँ तो जाएँ कहाँ ?..


खेलने का मन करता है तो - कलमाडी –CWG याद जाते हैं ?

पढ़ने का मन करता है तो - आरक्षण याद जाता है ?

मिठाई खाने का दिल करता है तो - जलेबी बाई याद जाती है ,

रोने का दिल करता है तो -सोनिया का बतला हाउस वाला आँसू याद जाता है

हँसने का दिल करता है तो - कॉंग्रेस सरकार याद आती है (सब सरकार पर हंसते हैं).

सोचता हूँ की पागल हो जाऊं तो- दिग्विजय सिंह याद जाता है ?

सोचता हूँ की इमानदर, देश भक्त बन जाऊं तो- शहीद याद जाते हैं ?

सोचता हूँ की हवाई जहाज़ का सफ़र करूँ तोविजय माल्या याद जाते हैं ?

सोचता हूँ की मूह बंद कर के रहूं तो - मन मोहन सिंह याद जाते हैं ?

सोचता हूँ की लोगों का सेवा करूँ तो - नेता याद जाते हैं ?

सोचता हूँ की शरीर को निर्मल करूँ तो - निर्मल बाबा याद जाते हैं ?

अब आप ही बताओ - जाएँ तो जाएँ कहाँ ?.......

2 टिप्‍पणियां:

  1. Achchha likha hai...lekin ye sab log jo yaad aa rahe hain un sab ko bhool kar apne aap ko yaad rakhiye...

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  2. waah neelima ji bhaut umda baat kahi aapney .... waise ankur bhai achcha likha hai aapney ishwar aapki kalam ko aur dhaar de

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